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Beyond
Times
Random Thoughts ...
This blog is about expressing and sharing thoughts which are not structured and can be termed as random. Randomness has its own charm and beauty which is often nostalgic and Beyond Times.
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सफ़र की हैरानियाँ
ख़्वाहिशों की हसीन मंजिले- और सफ़र की हैरानियाँ ... मीनार की आड़ में- उदास मन का डूबता अनमना सूरज चाँदनी बन रातों में खिली धूप पुल की मेहराबों पर सोते परिंदे उनींदे पेड़ उचटती रातें- और ख्वाबों की तन्हाइयाँ ... आकाशगंगा से टूटता एक तारा मन्नत को तकती आँखें रात के सन्नाटे में- बसंत की दस्तक स्नेहिल आग़ोश में- पल्लवित होतीं नवकोंपलें भँवरों की गुनगुनाहट फाग की थाप- और ख्यालों की अल्हड़ पुरवाइयाँ ... फटती पों - फिसलता रात का घूँघट सूरज को फिर
Manoj Mittal
6 days ago1 min read


यह ज़रूरी नहीं
सर्द, अफ़सुर्दा मौसम की भीगी दोपहर को रोशनी का दरीचा मिले ही- यह ज़रूरी नहीं। उदास रातों में आए मासूम ख़्वाबों को ज़मीं-ए-हक़ीक़त नसीब हो ही- यह ज़रूरी नहीं। लम्हों ने तराशा क़तरा-क़तरा वक़्त को हर लम्हे को सिला हासिल हो ही- यह ज़रूरी नहीं। उम्र-भर चला सहेजे यादों के जिन उजालों को मंज़िलों तक वो साथ निभाएँ ही- यह ज़रूरी नहीं। सपनीली ज़मीं पर रोपे ख़्वाहिशों के अंकुरों को माकूल आबोहवा मयस्सर हो ही- यह ज़रूरी नहीं। ख़ुद को खोजने में ख़ुद से किए सवालों को आसमानी जवाब मिलें ही
Manoj Mittal
Jan 252 min read


परिंदों की बेख़ौफ़ उड़ान
ज़ालिम कितना ही हो ज़माना, कितने ही क्यों न करे वो सितम— कहाँ रोक सकेगा वो -सरहदों पार परिंदों की बेख़ौफ़ उड़ान। आँधियाँ पूरी ताक़त से राहों पर धूल उड़ाएँगी, हौसलों के पंखों को लेकिन दीवारें कहाँ रोक पाएँगी। उजड़ेगी बगिया और गुलशन भी होंगे वीरान यहाँ, पछताएगा मगरूर माली- बहार कहीं और जो ठहर जाएगी। परिंदे बुन ही लेंगे सपनों के नए आशियाने प्रस्फुटित होंगी नव कोपलें और चमन होंगे गुलज़ार वहाँ | इतिहास गवाह है— दौर-ए-ज़ुल्म कभी ठहरता नहीं, उड़ान भर ले तू , परिंदे— थाम सके जो
Manoj Mittal
Dec 31, 20252 min read


सोनगंगा का वो पुल
दे वखेड़ा उत्तरप्रदेश के रानीपुर जिले मे बुंदेलखंड क्षेत्र का एक बेहद पुराना और खूबसूरत गाँव है | यह विंध्य पर्वत श्रंखला के थोड़ा उत्तर में स्थित है | यह विंध्य का पठारी क्षेत्र है | देवखेड़ा वैसे तो लगभग मैदानी और समतल जमीन पर बसा है परंतु उसके दक्षिण और पश्चिम में घने जंगल और छोटी पहाड़ियाँ है | देवखेड़ा के पूर्व में यमुना की एक सहायक नदी सोनगंगा है, जो मलाना की ओर से आकर लगभग साठ किलोमीटर दूर किशनपुर कस्बे के पास यमुना मे विलीन हो जाती है | किशनपुर में गिरिजा देवी का एक ऐतिहास
Manoj Mittal
Dec 24, 202517 min read
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